Vrindavan Rangnath Temple Brahmotsav: 200 साल पुराने चंदन के विशाल रथ पर निकले भगवान गोदा रंगमन्नार, रथ खींचने उमड़े श्रद्धालु
वृंदावन। उत्तर भारत के दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैली के विशाल श्री रंग मंदिर के ब्रह्मोत्सव में चैत्र कृष्ण पक्ष नवमी पर भगवान ठाकुर गोदा रंगमन्नार की भव्य रथयात्रा निकाली गई। लगभग 200 वर्ष पुराने चंदन की लकड़ी से निर्मित करीब 60 फीट ऊंचे दिव्य रथ पर विराजमान भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
ब्रह्मोत्सव के अंतर्गत प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में भगवान रंगनाथ श्रीदेवी और भूदेवी के साथ गर्भगृह से पालकी में विराजमान होकर निकले। ज्योतिष गणना के अनुसार शुभ मेष लग्न में भगवान को भव्य रथ पर विराजित किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर "रंगनाथ भगवान की जय" के जयकारों से गूंज उठा। मंदिर के पुरोहित विजय किशोर मिश्र ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत पूजन कराया।
रथ खींचने के लिए भक्तों में लगी होड़
करीब एक घंटे तक चली पूजा के बाद सात कूपों के धमाके और पारंपरिक संकेतों के साथ रथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। जैसे ही रथ आगे बढ़ा, श्रद्धालुओं में रथ खींचने की होड़ लग गई। भक्त इसे अपना सौभाग्य मानते हुए पूरे उत्साह के साथ रस्सियां खींचते नजर आए।
बड़ा बगीचा पहुंची रथयात्रा
मध्यान्ह में भगवान की रथयात्रा रंगजी के बड़ा बगीचा पहुंची, जहां विश्राम के बाद रथ पुनः मंदिर के लिए रवाना हुआ। रथ घर पहुंचने के बाद भगवान को पुनः पालकी में विराजमान कर बगीची ले जाया गया, जहां शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से रंगीन फव्वारे चलाए गए।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
श्री रंगनाथ मंदिर का ब्रह्मोत्सव वृंदावन के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है, जिसमें देशभर से श्रद्धालु भाग लेने पहुंचते हैं। यह रथयात्रा भगवान के भक्तों को उनके करीब लाने और भक्ति भाव को मजबूत करने का प्रतीक मानी जाती है।



