अमेरिका में ट्रंप की नीतियों के खिलाफ उबाल, हजारों लोग सड़कों पर उतरे

  • Sunday March 29 2026 - 10:13 AM
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  • 50 राज्यों में 3200 से ज्यादा रैलियां; बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक गूंजा विरोध

वाशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन की नीतियों के खिलाफ अमेरिका में व्यापक विरोध देखने को मिल रहा है। देशभर में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और जगह-जगह रैलियां व प्रदर्शन आयोजित किए गए। आयोजकों के अनुसार, सभी 50 राज्यों में 3200 से अधिक विरोध कार्यक्रम तय किए गए हैं, जिन्हें अब तक का सबसे बड़ा एकदिवसीय अहिंसक प्रदर्शन बताया जा रहा है।

न्यूयॉर्क, लॉस एंजलिस और वाशिंगटन जैसे बड़े शहरों में भारी भीड़ उमड़ी, लेकिन खास बात यह रही कि दो-तिहाई प्रदर्शन छोटे शहरों और कस्बों में हुए। आयोजकों का कहना है कि छोटे समुदायों में इस बार करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो आंदोलन के विस्तार को दर्शाता है।

वाशिंगटन के नेशनल मॉल में प्रदर्शनकारियों ने लोकतंत्र के समर्थन में नारे लगाए और ट्रंप प्रशासन के खिलाफ तख्तियां लहराईं। वहीं मैरीलैंड के चेवी चेज में बुजुर्गों ने व्हीलचेयर पर बैठकर भी विरोध दर्ज कराया और ‘तानाशाही का विरोध करो’ जैसे संदेश दिए। ऑस्टिन में सिटी हॉल के बाहर प्रदर्शनकारियों के जुटने के दौरान ब्रास बैंड ने माहौल को और जीवंत बना दिया।

इस आंदोलन को संगठित करने में Indivisible की अहम भूमिका रही। संगठन की सह-संस्थापक लेह ग्रीनबर्ग ने कहा कि इस बार आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत इसकी व्यापक पहुंच है—सिर्फ भीड़ नहीं, बल्कि विरोध के स्थान भी महत्वपूर्ण हैं। आगामी मध्यावधि चुनावों को देखते हुए आयोजकों का दावा है कि इडाहो, व्योमिंग, मोंटाना और यूटा जैसे रिपब्लिकन गढ़ों में भी विरोध प्रदर्शनों में भागीदारी तेजी से बढ़ी है। 

हालांकि, व्हाइट हाउस ने इन रैलियों को गंभीरता से लेने से इनकार किया है। प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने इन्हें ‘ट्रंप डिरेंजमेंट’ बताते हुए कहा कि ऐसे प्रदर्शनों में आम जनता की नहीं, बल्कि केवल मीडिया की दिलचस्पी है। देशभर में फैले इस व्यापक विरोध ने साफ संकेत दिया है कि ट्रंप की नीतियों को लेकर अमेरिकी समाज में मतभेद गहराते जा रहे हैं और इसका असर आने वाले चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।