Vrindavan Rangnath Temple Brahmotsav 2026:
पुष्पक विमान में निकले भगवान गोदा रंगमन्नार, अंतिम दिवस 50 हजार श्रद्धालु ने किए दर्शन
वृंदावन। श्री रामानुज संप्रदाय के प्रमुख और विशालतम श्री रंग मंदिर के दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव का सोमवार देर रात भव्य धार्मिक अनुष्ठानों के साथ समापन हो गया। अंतिम दिवस भगवान ठाकुर गोदा रंगमन्नार देशी-विदेशी फूलों और केले के तनों से सुसज्जित भव्य पुष्पक विमान में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देने निकले। भगवान की इस दिव्य सवारी के दर्शन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।
वृंदावन, कोलकाता के कारीगरों ने बनाया पुष्पक विमान
ब्रह्मोत्सव के समापन अवसर पर भगवान की सवारी विशेष रूप से तैयार पुष्पक विमान में निकाली गई। इस विमान को वृंदावन और कोलकाता के दो दर्जन से अधिक कारीगरों ने लगभग 24 घंटे की मेहनत से तैयार किया था। विमान को विभिन्न प्रकार के फूलों, केले के तनों और पारंपरिक कलाकारी से सजाया गया था। पुष्पक विमान में विराजमान भगवान रंगनाथ और माता गोदा जी की मनोहारी छवि श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रही थी।
12 भोग और 12 आरती के साथ हुआ विशेष पूजन
अंतिम दिवस भगवान का विशेष पुष्पार्चन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मंदिर के आचार्यों ने भगवान को पुष्प अर्पित किए। परंपरा के अनुसार भगवान को 12 प्रकार के भोग अर्पित किए गए तथा 12 आरतियां उतारी गईं।
स्वागत में रास्ते भर बनाई गई आकर्षक रंगोली
रात करीब 10:30 बजे जैसे ही भगवान की सवारी मंदिर के पश्चिमी द्वार पर पहुंची, भक्तों ने उनके स्वागत में विशाल रंगोली सजाई थी। करीब 50 फीट लंबी और 30 फीट चौड़ी रंगोली के बीच से भगवान की सवारी निकली तो श्रद्धालुओं ने महाआरती कर स्वागत किया। सिंह द्वार सहित पूरे मार्ग में भक्तों ने फूलों और रंगों से सुंदर रंगोलियां बनाईं। कई स्थानों पर भगवान की सवारी का पुष्प वर्षा और महाआरती से स्वागत किया गया।
50 हजार श्रद्धालुओं की मौजूदगी में हुआ समापन
भगवान की पुष्पक विमान सवारी के दौरान करीब 50 हजार से अधिक श्रद्धालु देर रात तक मौजूद रहे। मंदिर परिसर से लेकर बड़ा बगीचा तक श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आई। मध्यरात्रि के बाद लगभग 1 बजे भगवान की सवारी नगर भ्रमण के पश्चात मंदिर लौटी। जहां गरुड़ स्तंभ के पास मंडप में भगवान को विराजमान कर ब्रह्मोत्सव के दौरान अनजाने में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा प्रार्थना की गई और विश्व कल्याण की कामना की गई।
ध्वज अवतरण के साथ हुआ ब्रह्मोत्सव का समापन
अंत में गरुड़ स्तंभ से ध्वज उतारकर भगवान को विदाई दी गई और वैदिक परंपरा के अनुसार ब्रह्मोत्सव का विधिवत समापन किया गया।



