Vrindavan Rangnath Temple Brahmotsav: स्वर्ण घोड़े पर सवार होकर निकले भगवान रंगनाथ, आतिशबाजी से गूंज उठा बड़ा बगीचा

  • Wednesday March 18 2026 - 12:55 AM
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वृंदावन। तीर्थनगरी वृंदावन के प्रसिद्ध श्री रंगनाथ (रंगजी) मंदिर के दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव के अष्टम दिवस भगवान ठाकुर रंगनाथ स्वर्ण निर्मित घोड़े पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकले। भगवान की इस दिव्य सवारी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े और बड़ा बगीचा क्षेत्र जयकारों से गूंज उठा।

स्वर्ण आभूषणों और रेशमी पोशाक में दिव्य स्वरूप

शनिवार को आयोजित ब्रह्मोत्सव के तहत पारंपरिक लीलानुसार भगवान रंगनाथ को बहुमूल्य स्वर्ण आभूषणों और रेशमी जरी की पोशाक से अलंकृत किया गया। हाथ में रजत निर्मित भाला धारण किए भगवान का अद्भुत स्वरूप श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा था। इससे पूर्व मंदिर में सुगंधित द्रव्यों से भगवान का तिरुमंजन (अभिषेक) किया गया। इसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात भगवान को स्वर्ण अश्व पर विराजमान कर शोभायात्रा निकाली गई।

सोने के घोड़े पर सवार होकर मंदिर से निकले भगवान गोदारंगमन्नार के दौरान होती आतिशबाजी।  

 

बड़ा बगीचा में भव्य आतिशबाजी से हुआ स्वागत

भगवान की सवारी जब विश्राम स्थल बड़ा बगीचा पहुंची तो वहां कुछ समय विश्राम के बाद मुख्य द्वार पर भव्य आतिशबाजी से उनका स्वागत किया गया। रंग-बिरंगी रोशनी से पूरा क्षेत्र जगमगा उठा और श्रद्धालुओं ने इस दिव्य दृश्य का आनंद लिया।

भील लूटन लीला का हुआ आयोजन

सवारी के मंदिर लौटने के बाद परंपरानुसार भील लूटन लीला का आयोजन किया गया। यह लीला श्री परकाल स्वामी की कथा से जुड़ी है, जो श्रीवैष्णव परंपरा के महान भक्त माने जाते हैं।

परकाल स्वामी की कथा का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार परकाल स्वामी वैष्णवों की सेवा को सर्वोपरि मानते थे और तदीयाराधन (वैष्णवों को भोजन कराने) के लिए हर संभव प्रयास करते थे। कथा के अनुसार एक बार वैष्णव सेवा के लिए धन की व्यवस्था न होने पर उन्होंने जंगल में अपने भील साथियों के साथ एक योद्धा वेश में जा रहे भगवान को घेर लिया और उनके आभूषण ले लिए। बाद में जब उन्हें ज्ञात हुआ कि वे स्वयं बैकुंठनाथ भगवान हैं तो उन्होंने क्षमा याचना की। मान्यता है कि इस लीला के दर्शन से भक्तों को दारिद्र्य, भय और दुःख से मुक्ति तथा जीवन में निर्भयता की प्राप्ति होती है।