नव संवत्सर 2083: वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में ठाकुरजी को पंचांग पढ़कर सुनाया,जानिए कैसा रहेगा नया साल
- वर्ष न्यायप्रिय और अपराधियों के लिए दंडकारी
- सोना और पीतल के दाम बढ़ने की संभावना
- कई देशों में सत्ता परिवर्तन के योग बन सकते हैं
वृंदावन (मथुरा)। तीर्थनगरी वृंदावन स्थित प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में गुरुवार सुबह हिंदू नव वर्ष नव संवत्सर 2083 के अवसर पर पारंपरिक विधि-विधान से नए पंचांग का पूजन किया गया। मंदिर के पुरोहितों ने मंत्रोच्चार के बीच आराध्य ठाकुर बांके बिहारी महाराज के समक्ष पूरे वर्ष का ज्योतिषीय लेखा-जोखा प्रस्तुत किया और वर्ष भर के प्रमुख पर्व-त्योहारों का वाचन किया।
ग्रह स्थिति के अनुसार वर्ष का फलादेश
पंचांग वाचन के दौरान पुरोहित आचार्य छैल बिहारी मिश्र ने बताया कि नव संवत्सर 2083 में राजा बृहस्पति, मंत्री मंगल, रसे सूर्य, धनेश एवं फलेश गुरु, कोतवाल चंद्रमा, कृषि विभाग शुक्र तथा खनिज विभाग के स्वामी शनि माने गए हैं। उन्होंने बताया कि रौद्र संवत्सर के प्रभाव से अपराध प्रवृत्ति के लोगों में सुधार के संकेत हैं, अन्यथा प्रकृति अपना संतुलन स्वयं स्थापित करेगी। यह वर्ष सज्जन और न्यायप्रिय लोगों के लिए शुभ तथा अपराधियों के लिए दंडकारी माना जा रहा है।
पंचांग के अनुसार:
- कई देशों में सत्ता परिवर्तन के योग बन सकते हैं
- कुछ स्थानों पर आंतरिक संघर्ष की स्थितियां बन सकती हैं
- रक्षा के दृष्टिकोण से देश मजबूत रहेंगे
- सोना और पीतल के दाम बढ़ने की संभावना
- वर्षा सामान्य से अच्छी हो सकती है
- भूजल स्तर में कमी के संकेत
ठाकुरजी को लगाया माखन-मिश्री और नीम का भोग
पंचांग पूजन के बाद मंदिर के सेवायत गोस्वामियों ने ठाकुरजी को माखन-मिश्री और नीम की कोंपल का विशेष भोग अर्पित किया। बाद में यह प्रसाद भक्तों में वितरित कर नव वर्ष की शुभकामनाएं दी गईं।
राधारमण मंदिर में भी हुई पंचांग वाचन परंपरा
इसके बाद आचार्य छैल बिहारी मिश्र ने वृंदावन के प्राचीन में भी आराध्य के समक्ष नए पंचांग का वाचन किया। यहां सेवायत गोस्वामियों द्वारा ठाकुरजी को छप्पन भोग अर्पित किए गए।
देश में गृहयुद्ध की संभावना, लेकिन बाहर से सुरक्षित
आचार्य छैल बिहारी मिश्र ने बताया कि इस वर्ष राजा बृहस्पति, मंत्री मंगल, रसे सूर्य, धनेश एवं फलेश गुरु, कोतवाल चंद्रमा, कृषि विभाग शुक्र तथा खनिज विभाग के स्वामी शनि माने गए हैं।राजा बृहस्पति, मंत्री मंगल,रसे सूर्य, धनेश एवं फलेश गुरु, कोतवाल चंद्रमा, कृषि विभाग शुक्र, खनिज विभाग के स्वामी शनि है। रौद्र संवत्सर नाम का अपराधी किस्म के व्यक्तियों में स्वयं सुधार आएगा अन्यथा पृकति द्वारा सुधार होगा। यह वर्ष सज्जन और न्यायकारी लोगों के लिए अनुकूल एवं अपराधियों के लिए दंडकारी रहेगा। कई देशों की सत्ता में बदलाव हो सकता है। गृह युद्ध के योग बन सकते हैं। सेना की दृष्टि से देश मजबूत रहेंगे। बाहरी रूप से सुरक्षित रहेगा। सोना, पीतल की कीमतों में बढोत्तरी हो सकती है। वर्षा परिपूर्ण होगी। जमीनी जल स्तर में कमी आएगी।
सदियों पुरानी है पंचांग श्रवण की परंपरा
राधारमण मंदिर के सेवायत पद्मनाभ गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में हिंदी नव वर्ष, तिथि, पर्व और उत्सव संवत परंपरा के अनुसार ही मनाए जाते हैं। भगवान को नव पंचांग सुनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसका विशेष धार्मिक महत्व है।



