चंबल नदी में गूंजी नन्हें मेहमानों की किलकारी, 200 से अधिक घड़ियाल शिशुओं ने लिया जन्म

  • Wednesday June 03 2026 - 12:46 AM
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  • 200 से अधिक घड़ियाल शिशुओं ने नदी में प्रवेश किया।
  • वन विभाग की विशेष निगरानी में सुरक्षित तरीके से पूरी हुई हैचिंग प्रक्रिया।
  • बाह क्षेत्र में घड़ियालों की बढ़ती आबादी से पर्यावरणविद् बेहद खुश।

बाह (आगरा)। उत्तर प्रदेश के बाह क्षेत्र से बहने वाली पवित्र और स्वच्छ चंबल नदी एक बार फिर नन्हें घड़ियालों की किलकारियों से गूंज उठी है। चंबल नदी के किनारे प्राकृतिक रूप से बने घोंसलों (नेस्ट) से निकलकर 200 से अधिक नवजात घड़ियाल शिशुओं ने नदी के पानी में अपना पहला कदम रख दिया है। घड़ियाल शिशुओं के इस सुरक्षित प्रवेश से वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग में भारी उत्साह है।

वन विभाग की कड़ी निगरानी में हुई हैचिंग

चंबल सफारी और वन्यजीव अभ्यारण्य क्षेत्र में घड़ियालों के कुनबे को बढ़ाने के लिए वन विभाग लंबे समय से मुस्तैद था। वन विभाग की विशेष टीमों द्वारा अंडों को शिकारियों और अन्य हिंसक जानवरों से बचाने के लिए चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही थी। विभाग की इसी कड़ी सुरक्षा और देखरेख के बीच 'हैचिंग' (अंडों से बच्चे निकलने की प्रक्रिया) पूरी तरह सफल रही।

चंबल में बढ़ा घड़ियालों का कुनबा

बाह के तटीय इलाकों में घड़ियाल शिशुओं के जन्म के बाद चंबल नदी में इनकी संख्या में भारी इजाफा दर्ज किया गया है। जलीय जीवों के अनुकूल माने जाने वाली चंबल नदी को घड़ियालों का सबसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास माना जाता है। वन अधिकारियों के मुताबिक, नए शिशुओं के आने से न सिर्फ नदी का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) मजबूत होगा, बल्कि चंबल में घड़ियालों की आबादी को एक नया रिकॉर्ड स्तर मिलेगा। फिलहाल, वन विभाग की टीमें नदी में प्रवेश कर चुके इन नन्हें शिशुओं की सुरक्षा के लिए लगातार पेट्रोलिंग कर रही हैं ताकि इन्हें पूरी तरह से सुरक्षित माहौल मिल सके।