अनोखी आस्था: कोलकाता से बांकेबिहारी के लिए झालमुड़ी लेकर पहुंचा भक्त, सेवायत भी रह गए हैरान

  • Friday May 22 2026 - 09:56 AM
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वृंदावन। विश्व प्रसिद्ध श्रीबांकेबिहारी मंदिर में भक्त अपने आराध्य को रिझाने और खुश करने के लिए तरह-तरह के अनूठे उपहार और छप्पन भोग लेकर आते रहते हैं। लेकिन इस बार ठाकुरजी के दरबार में आस्था का एक ऐसा अनोखा रंग देखने को मिला, जिसने मंदिर के सेवायतों समेत हर किसी को हैरान कर दिया। कोलकाता (कलकत्ता) से आया एक श्रद्धालु ठाकुरजी के लिए भोग स्वरूप 'झालमुड़ी' लेकर वृंदावन पहुंचा।

श्रद्धा भाव से सजी थी झालमुड़ी, सेवायत बोले- 'भाव प्रधान हैं ठाकुरजी'

कोलकाता निवासी श्रद्धालु जगदीश शर्मा विशेष रूप से तैयार की गई झालमुड़ी लेकर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत दिनेश गोस्वामी के निवास पर पहुंचे। उन्होंने सेवायत को पैकेट सौंपते हुए ठाकुरजी को इसका भोग लगाने का अनुरोध किया। जगदीश शर्मा ने बताया कि "इस झालमुड़ी को उनके परिवार की महिलाओं ने विशेष श्रद्धा और शुद्धता के साथ ठाकुरजी के लिए सजाया और तैयार किया था।" जब सेवायत दिनेश गोस्वामी ने पैकेट खोला, तो वह भी इस अनोखे और पवित्र भाव को देखकर चकित रह गए। उन्होंने पूरे विधि-विधान और श्रद्धा भाव से इस अनोखी भेंट को स्वीकार किया और ठाकुरजी को भोग के रूप में अर्पित किया।

मंदिर परिसर में रहा कौतूहल का विषय

ठाकुरजी को झालमुड़ी का भोग लगाए जाने की बात जैसे ही मंदिर परिसर में मौजूद अन्य श्रद्धालुओं को पता चली, यह सबके लिए आकर्षण का केंद्र बन गई। मंदिर में उपस्थित भक्तों का कहना था कि भगवान किसी महंगे छप्पन भोग के भूखे नहीं हैं, बल्कि वह तो सिर्फ भक्त के सच्चे भाव के भूखे हैं। यदि कोई वस्तु पूरी श्रद्धा से अर्पित की जाए, तो वह भगवान को अवश्य प्रिय होती है। इस तरह के अनोखे और भावपूर्ण भोग मंदिर की प्राचीन परंपराओं और आस्था को और जीवंत बनाते हैं। सेवायत दिनेश गोस्वामी ने श्रद्धालु जगदीश शर्मा और उनके परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भक्तों का ऐसा निश्छल प्यार और अनोखा भाव भगवान की सेवा में आनंद को और बढ़ा देता है।

सियासत से निकलकर ठाकुरजी के दरबार तक पहुंची 'झालमुड़ी'

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की मशहूर 'झालमुड़ी' पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनावों के दौरान पूरे देश में जमकर चर्चा में आई थी। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चुनाव प्रचार के दौरान एक दुकान पर रुककर झालमुड़ी का स्वाद लिया था और दूसरों को भी खिलाया था। चुनाव बीत जाने के बाद भी अब यह झालमुड़ी एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह राजनीतिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक है, क्योंकि पश्चिम बंगाल का एक भक्त पहली बार अपने आराध्य श्रीबांकेबिहारी लाल के लिए इसे महाप्रसाद के रूप में कोलकाता से लेकर वृंदावन आया है।